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Thursday, 7 January 2021

सूबे के 80 फीसदी परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी

सूबे के 80 फीसदी परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी


उत्तर प्रदेश में अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम ( आरटीई) 2009 लागू होने के लगभग 10 साल बाद भी परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है । प्रदेश सरकार की ओर से शिक्षा मंत्रालय को प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (पीएबी) की बैठक के लिए शैक्षिक सत्र 2019 20 की भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि 45625 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में से 80 प्रतिशत ऐसे हैं जहां तीनों विषयों ( भाषा, गणित/विज्ञान व सामाजिक विज्ञान) के शिक्षक नहीं है। जबकि यूपी में जुलाई 2011 को लागू आरटीई के अनुसार प्रत्येक उच्च प्राथमिक विद्यालय में अनिवार्य रूप से इन तीनों विषयों के शिक्षक होने चाहिए।



एक परिसर में संचालित प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूलों के संविलियन के बाद स्थिति थोड़ी सुधरी है, ऐसे उच्च प्राथमिक स्कूल हैं जो एक शिक्षक के भरोसे हैं।



29334 शिक्षकों के बाद नहीं हुई सीधी भर्ती
बेसिक शिक्षा परिषद ने विज्ञान व गणित विषय के 29334 सहायक अध्यापकों की भर्ती के बाद उच्च प्राथमिक स्कूलों में सीधी भर्ती नहीं की है। 29334 की नियुक्ति प्रक्रिया 2013 में शुरू हुई थी और आज तक पूरी नहीं हो सकी है। यह मामला वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है।


विवाद के कारण प्रमोशन नहीं हो रहा
उच्च प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की कमी के पीछे बड़ा कारण प्रमोशन न होना है। प्राथमिक स्कूलों के सहायक अध्यापकों का प्रमोशन नियुक्ति के तीन साल बाद प्राथमिक के प्रधानाध्यापक या उच्च प्राथमिक स्कूल के सहायक अध्यापक पद पर होता है। दो साल पहले कुछ शिक्षकों ने प्रमोशन में टीईटी अनिवार्य करने के लिए याचिका कर दी थी। उसके बाद से पूरे प्रदेश में प्रमोशन रुके हुए हैं। जबकि उच्च प्राथमिक स्कूलों में 100 प्रतिशत पद प्रमोशन से भरे जाते हैं। प्रयागराज में 3 मार्च 2009 के बाद नियुक्त शिक्षकों का प्रमोशन नहीं हुआ है।