इंतजार : सालों बाद भी पूरी नहीं हुईं बेसिक शिक्षा विभाग की दो शिक्षक भर्तियां, अभ्यर्थियों की टूट रही आस - PRIMARY KA MASTER | Update Marts | Primary Teacher | Basic Shiksha News

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Monday, 14 December 2020

इंतजार : सालों बाद भी पूरी नहीं हुईं बेसिक शिक्षा विभाग की दो शिक्षक भर्तियां, अभ्यर्थियों की टूट रही आस

इंतजार : सालों बाद भी पूरी नहीं हुईं बेसिक शिक्षा विभाग की दो शिक्षक भर्तियां, अभ्यर्थियों की टूट रही आस


बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापकों की भर्ती सालों में पूरी नहीं हो सकी हे। इसके चलते हजारों बेरोजगार नौकरी के इंतजार में बैठे हैं। 


उच्च प्राथमिक स्कूलों में विज्ञान व गणित विषय के 29334 सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए 11 जुलाई 2013 को शुरू हे अब तक पूरी नहीं हो सकी है। सात हजार रिक्त पदों पर नियुक्ति की आस लगाए बेरोजगार बैठे हैं। इस भर्ती के नियुक्ति पत्र सितंबर 2015 में निर्गत किए गए थे। उसके बाद रिक्त लगभग 7000 सीटों को भरने के लिए अभ्यर्थियों ने न्यायालय का सहारा लिया। जिस पर नवंबर 2016 में हाईकोर्ट ने सभी रिक्त पद भरने का आदेश दिया। 



कोर्ट के आदेश के क्रम में बेसिक शिक्षा परिषद ने 30 दिसंबर 2016 को सभी रिक्त पद भरने के लिए आदेश जारी किया। लेकिन जनवरी 2017 में आदर्श आचार संहिता के प्रभाव से नियुक्ति प्रक्रिया बाधित हो गई। सरकार ने 23 मार्च 2017 को सभी भर्ती प्रक्रियाओं को समीक्षा के नाम पर रोक दिया था। प्रभावित अभ्यर्थियों ने इस रोक के खिलाफ याचिका की जिस पर हाईकोर्ट ने3 नवंबर 2017, 12 अप्रैल 2018 और 25 मार्च 2019 को भर्ती के आदेश दिए। 


हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी की और तबसे मामला लंबित है। वहीं दूसरी ओर प्राथमिक स्कूलों में 12460 सहायक अध्यापकों की भर्ती 15 दिसम्बर 2016 को शुरू हुई थी। इस भर्ती में 51 जिलों में रिक्त पद थे और 24 में कोई पद खाली नहीं था। जिन 24 जिलों में पद नहीं थे वहां से बीटीसी करने वाले प्रशिक्षुओं के लिए निर्देश हुआकि-वोकिसी भीएक अन्य जनपद में आवेदन कर सकती हैं। बस्ती की मीना गुप्ता व रोहित यादव के अनुसार जिन 51 जिलों में रिक्त पद थे वहां से बीटीसी करने वाले अभ्यर्थियों का कहना था कि उनको प्राथमिकता मिलनी चाहिए भले ही शून्य 24 जनपद के अभ्यर्थियों की मेरिट अधिक क्‍यों ना हो। यह विवाद आज तक कोर्ट में लंबित है और तकरीबन साढ़े सात से आठ हजार पदों पर भर्ती पूरी नहीं हो सकी है।