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Thursday, 12 November 2020

फर्जी शिक्षकों के मामले में प्रदेश में अब अनामिकाओं की तलाश के लिए अब मानव संपदा पोर्टल पर टिकी STF की निगाहें

फर्जी शिक्षकों की गिरफ्तारी में जुटी स्पेशल टास्क फोर्स अब सूबे की और अनामिकाओं की तलाश के लिए राज्य सरकार के मानव संपदा पोर्टल को भी खंगाल रही है। सीतापुर से पांच नवंबर को गिरफ्तार फर्जी प्रधानाध्यापक देवरिया निवासी ऋषिकेश मणि त्रिपाठी से मिली जानकारियों के आधार पर कुछ अन्य फर्जी शिक्षकों की तलाश की जा रही है। ऋषिकेश सीतापुर में बजरंग भूषण के नाम से नौकरी कर रहा था। अनामिका प्रकरण की ही तर्ज पर आरोपित ऋषिकेश की पत्नी स्नेहलता ने भी सीतापुर में शिक्षका की नौकरी हासिल की थी। 


गोरखपुर में तैनात शिक्षिका स्वाती तिवारी के शैक्षणिक दस्तावेजों के जरिए स्नेहलता ने यह नौकरी हासिल की थी और पति के पकड़े जाने के बाद से वह फरार है। एसटीएफ ने स्नेहलता की तलाश के लिए दो टीमों को लगाया है। एसटीएफ के एएसपी सत्यसेन यादव ने बताया कि गोरखपुर में तैनात सहायक अध्यापिका स्वाती तिवारी के शैक्षणिक दस्तावेजों पर सूबे में तीन और स्वाती तिवारी सहायक अध्यापिका की नौकरी कर रही थीं। इनमें बराबंकी व देवरिया में तैनात दो फर्जी शिक्षिकाओं को पूर्व में गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। ऋषिकेश की पत्नी का असली नाम स्नेहलता तिवारी है। ऋषिकेश से पूछताछ में सामने आया था कि उसने ही अपनी पत्नी की नौकरी फर्जी दस्तावेजों के जरिए लगवाई थी। 

ऋषिकेश ने बताया कि उसके पिता राममणि त्रिपाठी देवरिया के अशोक इंटर कॉलेज में लेक्चरर थे और उन्होंने ने ही बजरंग भूषण व स्वाती तिवारी के शैक्षणिक दस्तावेज उपलब्ध कराए थे। ऋषिकेश की पत्नी स्नेहलता फर्जी नाम से सीतापुर के हरिहरपुर प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक के पद पर नौकरी कर रही थी। उसकी तलाश कराई जा रही है। एएसपी ने बताया कि आगरा के दयालबाग एजूकेशन इंस्टीट्यूटी में असिस्टेंट प्रोफेसर बजरंग भूषण की शिकायत पर इस प्रकरण की जांच शुरू की गई थी। एसटीएफ को फर्जी शिक्षकों से जुड़ी कई और शिकायतें मिली हैं। मानव संपदा पोर्टल के जरिए उनकी भी जांच की जा रही है। स्वाती तिवारी के दस्तावेजों के आधार पर कुछ अन्य फर्जी शिक्षिकाओं की नियुक्ति की भी आशंका है। दूसरे के दस्तावेजों पर नाम-पता बदलकर नौकरी कर रहे कई और फर्जी शिक्षक एसटीएफ के निशाने पर हैं। ध्यान रहे, पूर्व में अनामिका नाम की शिक्षिका के दस्तावेजों के जरिए इसी नाम पर कई फर्जी शिक्षिकाओं के नौकरी हासिल करने का मामला पकड़ा गया था।