शिक्षामित्र और शिक्षक भर्ती पर जिसने भी निम्नलिखित पोस्ट लिखी हो शत-शत नमन, मैंने पढ़ी तो नही पर बन्दे के धैर्य और लेखन का मैं कायल हो गया इतनी लंबी पोस्ट लिखना वाकई कबीले तारीफ है मेरी हिम्मत तो पढ़ने की भी नही हुई आप सभी पढ़े यदि कुछ महत्वपूर्ण हो तो समूह में अवश्य साझा करें✅ - PRIMARY KA MASTER | Update Marts | Primary Teacher | Basic Shiksha News

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Sunday, 25 October 2020

शिक्षामित्र और शिक्षक भर्ती पर जिसने भी निम्नलिखित पोस्ट लिखी हो शत-शत नमन, मैंने पढ़ी तो नही पर बन्दे के धैर्य और लेखन का मैं कायल हो गया इतनी लंबी पोस्ट लिखना वाकई कबीले तारीफ है मेरी हिम्मत तो पढ़ने की भी नही हुई आप सभी पढ़े यदि कुछ महत्वपूर्ण हो तो समूह में अवश्य साझा करें✅

जिसने भी निम्नलिखित पोस्ट लिखी हो शत शत नमन मैंने पढ़ी तो नही पर बन्दे के धैर्य और लेखन का मैं कायल हो गया इतनी लंबी पोस्ट लिखना वाकई कबीले तारीफ है मेरी हिम्मत तो पढ़ने की भी नही हुई आप सभी पढ़े यदि कुछ महत्वपूर्ण हो तो समूह में अवश्य साझा करें✅😊



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ए एस जी ने न्यायालय में सुनवाई शुरू होते ही कोर्ट को अवगत कराया कि सरकार ऐसे शिक्षमित्रों, जो इस परीक्षा उपरांत सहायक अध्यापक नहीं बन पाएंगे उन्हे उनकी सेवानिवृत्ति कि उम्र तक बेसिक शिक्षा में सेवा करने का मौका देगी अगर वो ऐसा चाहते हैं I इस पर न्यायालय द्वारा तुरंत टिप्पणी की गयी कि “इसका अर्थ है कि सरकार उनसे वो सेवा लेगी जिसके एवज में अन्य नियमित अध्यापक को 40-50 हजार दिये जा रहें हैं जबकि शिक्षमित्रों को केवल 10 हजार दिये जाएँगे, यदि आप अध्यापकों कि गुणवत्ता के प्रति इतने अधिक सजग हैं तो आपने बच्चों का भविष्य शिक्षामित्रों के हाथों में क्यों दिया हुआ है ?” I इस पर ए एस जी ने कोर्ट को बताया कि शिक्षामित्र सहायक अध्यापक नहीं है इन्हें बेसिक विद्यालयों में सहायक अध्यापकों को असिस्ट करने के लिए रखा गया है I कोर्ट द्वारा स्पष्ट किया गया कि इसका अर्थ है कि ये Deputy सहायक अध्यापक के समान कार्य कर रहें हैं I ए एस जी द्वारा फिर से कहा गया कि milord सरकार इन्हे हटाना नहीं चाहती है I
ए एस जी ATRE-2019 परीक्षा के आंकड़े बताती हुई कहती हैं कि इस परीक्षा में कुल 410000 अभ्यर्थी सम्मिलित हुए जबकि सरकार द्वारा तय मानक पर 146000 अभ्यर्थी सफल हुए लेकिन नौकरी केवल विज्ञापित पद 69000 अभ्यर्थियों को ही दी जानी है नाकि कुल सफल 146000 अभ्यर्थियों को I इसके साथ ही परीक्षा में सम्मिलित हुए एवं 40-45 पर उत्तीर्ण शिक्षामित्रों एवं अन्य अभ्यर्थियों की संख्या बताते हुए ए एस जी द्वारा कोर्ट को बताया गया कि यदि कट ऑफ (न्यूनतम उत्तीर्णांक) 40-45% कर दी जाये तो तीनों श्रेणियों (बीएड, बीटीसी एवं शिक्षामित्र) के कुल उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की संख्या 394195 होगी I इस परकार यदि 40-45 उत्तीर्णांक पर परिणाम घोषित किया जाता है तो परीक्षा में सम्मिलित हुए कुल अभ्यर्थियों में से 96.2% प्रतिशत अभ्यर्थी उत्तीर्ण होंगे I इसके बाद ए एस जी कोर्ट को अवगत कराती हैं कि विपक्ष के द्वारा इस भर्ती को पूर्व में हुई 68500 के साथ जोड़ते हुए दूसरा भाग कहा जा रहा है और दोनों भर्ती परीक्षाओं में अंतर स्पष्ट करने का प्रयास करती हैं I ATRE-2018 में सम्मिलित हुए और उत्तीर्ण हुए अभ्यर्थियों का आंकड़ा कोर्ट को बताया जाता है I ATRE-2019 के संदर्भ में बताया जाता है कि यहाँ अभ्यर्थियों कि संख्या में बी एड को सम्मिलित करने के कारण अत्यधिक इजाफा हुआ लेकिन बी एड को सम्मिलित करने में सरकार की कोई भूमिका नहीं है यह NCTE के अधिकार क्षेत्र में आता है और इस सदर्भ में NCTE का नोटिफ़िकेशन ATRE-2019 के विज्ञापन से बहुत समय पहले जारी हो गया था I ए एस जी द्वारा कोर्ट को बताया गया कि मैं सहमत हूँ कि इस संबंध में स्टेट रुलिंग में खामिया हुई हैं, स्टेट द्वारा संशोधन उचित समय और एक बार में ही किए जा सकते थे लेकिन यदि में ATRE-2019 के विज्ञापन के संबंध में बात करूँ तो ये विज्ञापन NCTE द्वारा बी एड के संदर्भ में जारी अधिसूचना के पश्चात जारी किया गया I कोर्ट द्वारा ATRE-2018 के पश्चात रिक्त पदों (68500-41556=26944) के संबंध में स्टेट से पूछा गया तो ए एस जी द्वारा बताया गया कि ये पद अभी भी रिक्त हैं और हमने अपनी modification अपील में यह कोर्ट को यह बताया है कि हमारे पास लगभग 50000 पद अभी भी रिक्त हैं और लगभग 10000 शिक्षक प्रतिवर्ष सेवानिवृत्त हो रहें हैं I जज द्वारा इस पर प्रश्न किया गया कि “क्या आप एक और चयन प्रक्रिया पर कार्य कर रहें हैं ?” I इस पर ए एस जी द्वारा बताया गया कि “Yes milord, we will….it is not underway yet, but we will have to have another recruitment” अर्थात जी मिलोर्ड, प्रक्रिया अभी प्रोसेस में नहीं है लेकिन हमे एक और भर्ती प्रक्रिया करनी है I

कोर्ट द्वारा कहा गया कि “ATRE-2019 में 60-65% पर उत्तीर्ण हुए कुल 146000 अभ्यर्थियों में से केवल 69000 को नौकरी में लिए जाएगा जिसमे लगभग 8000 शिक्षामित्र और बाकी बचे 61000 पदों पर अन्य अभ्यर्थियों का चयन होगा जबकि यदि न्यूनतम उत्तीर्णांक 40-45% कर दिया जाये तो (32629+8018) लगभग 40000 पदों पर शिक्षामित्रों का चयन होगा जिसमे उन्हे भारांक भी दिया जाएगा और शेष बचे अन्य पद लगभग 29000 पर अन्य अभ्यर्थियों का चयन होगा I इस पर ए एस जी द्वारा कहा गया कि मीलोर्ड मैं आंकड़ों के संदर्भ में sure नहीं हूँ जिस पर कोर्ट ने बताया कि यह सब हमारे रेकॉर्ड में है I

कोर्ट ने कहा कि याचियों के वकीलों द्वारा डॉ सुझाव दिये गए हैं जिसमे वी. शेखर और अन्य ने कहा है कि यदि सभी के लिए शिक्षामित्रों के समान 40-45% न्यूनतम मानक तय होता है तो दिव्याङ्ग, भूतपूर्व सेवक और स्वतन्त्रता सेनानी की श्रेणी में आने वाले अभ्यर्थी भी चयन प्रक्रिया में सम्मिलित होंगे अन्यथा वे यह नौकरी पाने की स्थिति में नहीं हैं I याचियों के अन्य वकील डॉ धवन द्वारा लॉजिक दिया गया कि 69000 पदों के सापेक्ष 40-45% मानक पर पहले सभी शिक्षामित्रों को लिए जाये और जो 29000 पद शेष रह जाते हैं उनके लिए आप जो भी मानक चाहते है तय कर सकते हैं I लेकिन इस भर्ती परीक्षा में दो प्रकार के अभ्यर्थी सम्मिलित हुए हैं पहले “शिक्षामित्र” और दूसरे प्रकार के “शिक्षामित्रों से अन्य अभ्यर्थी” इसलिए आपको शिक्षामित्रों को लेना चाहिए और शेष बचे अन्य पदों पर “मेरिट” के अनुसार I

इस पर ए एस जी द्वारा ATRE-2018 का आंकड़े बताते हुए कहा गया कि मिलोर्ड यदि इस भर्ती में शिक्षामित्रों को “विशेष वर्ग” का दर्जा दिया गया तो यह 68500 भर्ती के विरुद्ध होगा जोकि पूर्ण हो चुकी है I मिलोर्ड “न्यूनतम उत्तीर्णांक” तय करना सरकार और भर्ती एजेंसी के अधिकार क्षेत्र में है हमें यहाँ केवल यह स्पष्ट करना है कि स्टेट द्वारा तय किए गए मानक मानक में कोई मनमानी या दुर्भावना नहीं है और जो कट ऑफ 60-65% तय किया गया है वो तर्कपूर्ण है I

कोर्ट द्वारा कहा गया कि मैडम, इंजीनियरिंग और मेडिकल एंट्रैन्स एगज़ामिनेशन के बारे में देखा जाये तो मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के अनुसार केवल 50% न्यूनतम मानक तय किया जाता है लेकिन अनुभव के अनुसार देखा गया है कि केवल 50-55% पाने वाले अभ्यर्थियों कि गणना किसी मेडिकल सीट चयन हेतु नहीं की जाती क्योंकि “क्रीम” अभ्यर्थियों के चयन हेतु 90-95% मार्क्स पाने वाले अभ्यर्थियों को ही इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है I यदि कोई यह मानक निर्धारित करता है कि 90-95% से अधिक मार्क्स पाने वाले अभ्यर्थी को ही इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा तो इसे “तर्कपूर्ण” और “स्पष्ट idea” कहा जा सकता है क्योंकि वहाँ आप “उपलब्ध सीटस” और “परीक्षा में बैठने वाले अभ्यर्थियों के प्रकार” कि भली भाति जानकारी होती है और यह भी स्पष्ट रहता है कि यदि आप केवल “टॉप अभ्यर्थियों” को सीटस के लिए चुनते हैं तब भी कोई “सीट” रिक्त नहीं रहेगी I इस प्रकार कि सिचुएशन में आप क्रीम अभ्यर्थियों के चयन हेतु परीक्षा के उपरांत मानक तय कर सकते हैं लेकिन 69000 भर्ती परीक्षा में स्थिति एकदम अलग है यहाँ “हेटोरोजीनियस” प्रकार कि सिचुएशन है इस परीक्षा में “होमोजीनियस” प्रकार के अभ्यर्थी सम्मिलित नहीं हुए हैं यहाँ एक प्रकार के अभ्यर्थी वे शिक्षामित्र हैं जिनहे उनकी पूर्व सेवा के लिए भारांक दिया जाना है और दूसरे प्रकार के अभ्यर्थी बी एड/बीटीसी हैं “If you apply the criteria for new comers’ or fresher’s, one can understand but if you are applying criteria of 60-65 even in respect of somebody actually ex and Shikshamitras’, it means you are treating two different idea in same basket.” अर्थात यदि आप नए अभ्यर्थियों (बी एड और बी टी सी) के लिए 60-65 मानक निर्धारित करते हैं तो समझ आता है लेकिंन यदि आप यही मानक किसी ऐसे अभ्यर्थी के लिए एक्स (सर्विसमेन) या वास्तव में शिक्षामित्र के लिए तय करते हैं तो इसका अर्थ है कि आप दो अलग अलग आइडियास एक ही जगह लगा रहे हैं I ए एस जी एक बार फिर ATRE 2018 का उदाहरण देते हुए बताती हैं कि उस भर्ती परीक्षा में भी शिक्षामित्रों को विशेष वर्ग का दर्जा नहीं दिया गया था, कोर्ट ए एस जी की बात पर ध्यान ना देते हुए बोलती है कि  "Madam, minimum marks stays as minimum, the single judge also observed." 
यहाँ दो बातें आपके against हैं – नंबर 1 – जब परीक्षा हुई तो आपने न्यूनतम पसिंग मार्क्स नहीं तय किया I राकेश द्विवेदी द्वारा बताया गया कि यदि आप यह मानक परीक्षा होने से लगभग 1 माह पहले कर देते तो उनके याची ज्यादा मेहनत कर सकते थे और उनके उत्तीर्ण होने चांसेसे बढ़ सकते थे I लेकिन आपने ऐसा नहीं किए इसलिए ऐसे अभ्यर्थियों ने अपने पूर्व अनुभव से 40-45% को मानक माना जोकि उन्हे आसान लगा I
यह केवल एक क्वालिफाईंग परीक्षा है अर्थात केवल इस परीक्षा के आधार पर ही अन्य सब कुछ Exclude नहीं किया जा सकता यह परीक्षा अन्य पैरामीटर के समान ही एक पैरामीटर है जिसका केवल 60% Consider किया जाना है I मान लेते हैं कि मैंने केवल 50% मार्क्स पाये हैं जिसका आपको केवल 60% लेना है और अब आप बोल रहें हैं कि क्योंकि आपने 65% मार्क्स नहीं पाएँ हैं या आपके 2 मार्क्स कम हैं या  64% मार्क्स ही आपको मिले हैं इसलिए आपको चयन प्रक्रिया से पूर्णतया बहार किया जाता है I
There are two basic issues that you need to address, number 1 is : 
जब आप एकदम अलग प्रकार के अभ्यर्थियों को परीक्षा में सम्मिलित कर रहे हो तब आपने 65% न्यूनतम कट ऑफ मानक निर्धारित किया, क्या यह high है या नहीं ? 
क्या यह शिक्षामित्रों को भर्ती से बाहर करने के लिए लगाया गया है ?  
Number 2 is : क्या यह परीक्षा के उपरांत किया जा सकता था या नहीं ?
ए एस जी बोलती हैं कि स्टेट के पास ATRE-2019 में 60-65 कट ऑफ़ निर्धारित करने के तीन कारण हैं जिसमे पहला कारण है अभ्यर्थियों की संख्या, मिलोर्ड़, यदि कट ऑफ़ को 40-45 कर दिया जाये तो 394195 अभ्यर्थी उत्तीर्ण होंगे जोकी परीक्षा में सम्मिलित होने वाले अभ्यर्थियों का 96.2 प्रतिशत है, मिलोर्ड़ इस प्रकार तो ATRE का कोई अस्तित्व ही नहीं रह जायेगा इस पर कोर्ट ने तुरंत टिप्पणी की "मैडम आपने 65 कट ऑफ़ एक दिन बाद तय किया, रिजल्ट भी जारी नहीं हुआ था, तब तक कैसे यह तथ्य ज्ञात हो गया कि 40-45% पर 96.2% अभ्यर्थी उत्तीर्ण होंगे उस समय तक ये fact किसी को नही पता था। जब अभ्यर्थियों ने अपने Application दिये तब भी आपको अभ्यर्थियों की संख्या के सम्बंध में अवश्य जानकारी थी, इस पर ए एस जी एक बार फिर से वही पूराना ATRE 2018  के अभ्यर्थियों की संख्या का उदहारण देती हैं लेकिन कोर्ट उन्हे अनसुना करते हुए कहती है कि मैडम जब अभ्यर्थी परीक्षा में सम्मिलित हो रहे थे उस समय भी आपके पास अभ्यर्थियों के संख्या में हुए इजाफे के पूर्ण जानकारी थी, उस समय आप सोच सकते थे कि आपको क्या करना है।
ए एस जी इस बात का उत्तर दिये बिना 65% कट ऑफ़ निर्धारित करने के पक्ष में दुसरा कारण बताने लगती हैं और कहती हैं कि अधिक संख्या होने के साथ साथ विज्ञापन में उल्लिखित परीक्षा का बादल गया पैटर्न भी एक कारण है, ATRE-2018 बहुउत्तरीय परीक्षा थी जबकि ATRE-2019 बहुवुकल्पीय परीक्षा थी जोकि OMR शीट पर ली गई थी।
उक्त के क्रम में ए एस जी तीसरे कारण का उल्लेख करती हुई कहती हैं कि RTI की शुरुआत से TET परीक्षा का आयोजन होता है जिसमे न्यूनतम उत्तीर्णांक 60% है। उत्तर प्रदेश में हुई TET परीक्षा में कुल 11 लाख अभ्यर्थी सम्मिलित हुए जिसमे 60% न्यूनतम उत्तीर्णांक होने पर कुल 4 लाख अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए, मिलोर्ड़ TET एक qualifying परीक्षा है यदि उसमे न्यूनतम उत्तीर्णांक 60% है जिस पर लगभग 4 लाख अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए तो ATRE-2019 में सामान्य श्रेणी के लिए न्यूनतम उत्तीर्णांक 5% बढाया जाना आवश्यक था । 
इस पर जज तुरंत स्पष्ट करते हैं कि यहाँ इसी प्रकार का लॉजिक की हम बात कर रहे हैं, शिक्षामित्र जो TET qualified हैं, उन्होने जब TET दिया तो उन्हे पर्याप्त समय पूर्व नियमों की जानकारी थी उन्हे मालूम था कि वहाँ न्यूनतम उत्तीर्णांक 60% हैं जिसके लिए उन्होने स्वयं को Capable बनाया और परीक्षा उत्तीर्ण की, लेकिंन ATRE परीक्षा में आपने कोई उत्तीर्णांक नहीं बताया उनमे से बहुत से अभ्यर्थी दुविधापूर्ण स्थिति में रहे होंगे, यदि आप सही समय पर ये उत्तीर्णांक declare कर देते जैसे TET में केंद्र सरकार द्वारा किया गया है तो शिक्षामित्र शायद उसी प्रकार इस परीक्षा को भी उत्तीर्ण कर सकते थे।
ए एस जी कोई जवाब ना देते हुए TET 2019 के बारे में बताने लगती हैं कि TET 2019 में 58894 शिक्षामित्र सम्मिलित हुए जिसमें 5994 उत्तीर्ण हुए, और TET 2018 में 100253 शिक्षामित्र सम्मिलित हुए जिसमे से 22000 शिक्षामित्र उत्तीर्ण हुए । यहाँ कोर्ट, स्टेट से qurey करते हुए पूछते हैं कि क्या इस परीक्षा में जो शिक्षामित्र सम्मिलित हुए वो सभी TET qualified हैं ?  ए एस जी इसका सकारत्मक जवाब देती हैं । कोर्ट फिर स्पष्ट करती है कि 
अर्थात ये सभी अभ्यर्थी 60% बेरियर को पास करके आये हैं। आपके द्वारा उपलब्ध कराये गए चार्ट इए अनुसार सभी शिक्षामित्र TET उत्तीर्ण हैं ।
ए एस जी फिर से ATRE 2018 और ATRE 2019 के परिपेक्ष्य में शिक्षामित्रों की संख्या की तुलना कर्ते हुए कहती हैं कि 34311 शिक्षामित्र ATRE 2018 में सम्मिलित हुए ये भी TET qualified थे, जिसमे से 8588 उत्तीर्ण हुए, ATRE 2019 में 45000 शिक्षामित्र सम्मिलित हुए जिसमे से केवल 8018 शिक्षामित्र उत्तीर्ण हुए । ATRE 2018 में न्यूनतम उत्तीर्णांक विज्ञापन में था तब भी 8588 शिक्षामित्र उत्तीर्ण हुए जबकि ATRE 2019 में विज्ञापन में उत्तीर्णांक नहीं था तब भी 8018 शिक्षामित्र इस परीक्षा को उत्तीर्ण कर पाये, इस प्रकार न्यूनतम उत्तीर्णांक परीक्षा पूर्व declare किये जाने या ना किये जाने का कोई matter नहीं करता ।  नियोक्ता और भर्ती एजेन्सी को ATRE 2018 और ATRE 2019 के अन्तर को देखते हुए कट ऑफ़ बढ़ाना पड़ा। लॉर्डशिप, यह कट ऑफ़ निर्धारित करना तर्कपूर्ण है इसमें  कोई Discrimination, कोई मनमानापन नहीं है। यही मेरा पहला submission है।
कोर्ट ए एस जी से परीक्षा में बी एड को सम्मिलित करने के बारे में प्रश्न पूछती है ।
इस पर ए एस जी बोलती हैं कि यहाँ NCTE को यहाँ पार्टी होना चाहिए था लेकिन NCTE यहाँ नहीं है। लेकिन लॉर्डशिप ये NCTE द्वारा सम्मिलित किया गया है जिसे स्टेट द्वारा follow किया जाता है, इस बारे में NCTE का notification 26.06.2018 को जारी किया गया था जोकि ATRE 2019 से काफी समय पहले था । मिलोर्ड़, मैं agree करती हूँ कि स्टेट द्वारा किये गए संशोधन सही समय पर किया जा सकते थे और इन्हे कई बार मे ना करके एक।ही बार में किया जा सकता था । विज्ञापन में इसका जिक्र किया गया था जोकी 1 दिसम्बर 2018 को जारी किया गया था । लॉर्डशिप, यहाँ ना विज्ञापन को challange नहीं किया गया, यहाँ rules को चैलेंज नहीं किया गया, हर एक केवल पूरी प्रक्रिया में सम्मिलित हो चुका है, परीक्षा उत्तीर्ण कर चके हैं, लॉर्डशिप  परीक्षा में सम्मिलित होने वाले 4 लाख अभ्यर्थी के कारण ही यह उत्तीर्णांक निर्धारित किया गया।
ए एस जी शिक्षामित्रों को उम्र में दी गई छूट से कोर्ट को अवगत कराते हुए कहती हैं कि विपक्ष द्वारा आरोप लगाया गया कि स्टेट शिक्षामित्रों की परवाह नहीं करता है यह बिल्कुल गलत है। एक बार फिर पेपर के पैटर्न, परीक्षा समय और प्रश्नों की पृकृति के अन्तर के बारे में बात दोहराती हैं और कुछ इस तरह के तर्क अपनी बहस में सम्मिलित करती हैं जिन्हे कोर्ट द्वारा इर्रेलेवेंट कहकर बोलने से मना कर दिया जाता है।
ए एस जी, modification application के संदर्भ में बोलती हैं और बताती हैं कि 16.01.2020 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए शिक्षामित्रों को दिये जाने वाले भारांक के विषय में बोलती हैं कि आप ही ने स्टेट को आदेश दिया है कि शिक्षामित्रों को प्रत्येक 4 वर्ष के अनुभव के लिए 1% का भारांक दिया जाये । इस पर कोर्ट ए एस जी को रोकते हुए बोलती है कि यहा स्टेट की इच्छा पर निर्भर करता है, यहाँ हमारे समक्ष दिये जाने वाले भारांक का कोई फॉर्मूला प्रस्तुत नहीं किया गया है । यह स्टेट पर निर्भर है और जो आप 1% का बोल रहे हैं वो केवल एक उदाहरण है। ए एस जी स्वयं को।justify करने का प्रयास करती हैं और कहती हैं की स्टेट शिक्षामित्रों के लिए कोई दुर्भावना नहीं रखता इसलिए मैं भारांक के विषय में बता रही हूँ। उस पर कोर्ट उन्हे रोकते हुए बोलती है कि भारांक का आपके द्वारा तय किये मानक का कोई सम्बंध नहीं है इसलिये इसका present केस से कोई मतलब नहीं है ।
ए एस जी एक बार फिर से भारांक का मुद्दा उठाते हुए कहतीं कि भारांक ATRE उत्तीर्ण होने के बाद फाइनल स्टेज मे दिया जाना है जिसमे कोर्ट एक बार फिर ए एस जी को टोक देती हैं और कहती हैं कि भारांक का यहाँ कोई केस नही है आपको 25% देना ही होगा । ए एस जी माफी मांगते हुए मुद्दे को left कर देती हैं ।
ए एस जी अपना next submission प्रस्तुत करती हैं और एक बार फिर TET qualified 11 लाख अभ्यार्थियो के विषय में बोलने लगतीं हैं इस पर फिर से एक बार कोर्ट उन्हे यह कहकर रोक देती है की ऐसे facts का प्रेजेंट केस से कोई सम्बंध नहीं है।
ए एस जी बोलती हैं कि लॉर्डशिप, कट ऑफ़ 60-65% करने के मैं तीन कारण आपके समक्ष रख चुकी हूँ। कोर्ट उनसे उनका written submission फ़ाईल करने के लिये बोल देती हैं।
नियमावली के उत्तीर्णांक निर्धारित करने के संदर्भ में वर्णित नियम को दिखते हुए कोर्ट को बताती हैं कि न्यूनतम उत्तीर्णांक तय करना स्टेट के अधिकार क्षेत्र में आता है जिसे समय समय पर निर्धारित किया जा सकता है। 
     यूनियन ऑफ़ इंडिया vs एस विनोद कुमार वाद में 2007 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश का हवाला देते हुए ए एस जी कहती हैं कि पैरा 10 और 11 मे लिखा हुआ है कि " कट ओफ्फ निर्धारित करने का अधिकार नियोक्ता को होता है, यदि कट ऑफ़ तर्कों के आधार पर निर्धारित किया गया हो" ।
इस बारे में दुसरा आदेश कोर्ट के समक्ष ए एस जी द्वारा प्रस्तुत किया जाता है जोकि बैंकिंग सर्विसेस रीक्रूटमेंट बोर्ड मद्रास vs वी. रामलिंगम और अन्य (1998) में पारित किया गया था जिसमे कट ऑफ़ निर्धारित करने के समबन्ध में पैरा 5 पढ़ती हैं लेकिन कोर्ट द्वारा उन्हे रोक दिया जाता है यहा कहकर की हम ये समझते हैं कि कट ऑफ़ तय करने का अधिकार आपको है कृपया आप हमें कोई ऐसा जजमेंट दिखाईये जिसमे इस प्रकार का कट ऑफ़ परीक्षा के बाद निर्धारित किया गया हो  ?  कोर्ट एक बार फिर पूछती हैं कि क्या एस विनोद कुमार जजमेंट में परीक्षा उपरांत तय किया गया था वह जजमेंट फिर से दिखाईये। ए एस जी एस विनोद कुमार का पैरा 10 और 11 एक बार फिर दोहराती हैं । 
जज इस जजमेंट से संतुष्ट नहीं होते और स्वयं उसका पैरा पढते हुए उसे नकार देते हैं ।
ए एस जी,  रेलवे में गनमेन भर्ती के बारे में पारित आदेश कोर्ट को दिखाती हैं, पैरा 9 पढ़ती हैं जिस कोर्ट द्वारा कहा जाता है कि इसमें केवल एक प्रकार के अभ्यर्थी सम्मिलित हैं जिसकी qualification 8वीं पास है लेकिन 69000 में "हेटोरोजिनीयस" प्रकार की स्थिति है। ए एस जी एक बार फिर ATRE 2018 और ATRE 2019 में शिक्षामित्रों को विशेष वर्ग का दर्जा ना देने की बात दोहराने लगती हैं जिसे जज एकदम खत्म कर्ते हुए बोलते हैं कि कुछ और आपके पास है इस सम्बंध में बताने के लिए? 
ए एस जी, झारखण्ड पब्लिक सर्विस कमीशन का जजमेंट पढ़ती हैं, जिसमे moderation कमेटी द्वारा परीक्षा उपरान्त मार्क्स निर्धारित करने के सम्बंध में विज्ञापन में जिक्र किया गया था ।
ए एस जी कट ऑफ़ को 60-65 करने के पक्ष में तर्क देती हैं कि यहा क्की दुर्भावनापूर्ण कार्य नहीं किया गया है। परीक्षा पैटर्न, अभ्यर्थियों की संख्या और TET में 60% उत्तीर्णांक होना हीये कट ऑफ़ निर्धारित करने का कारण है।
कोर्ट ए एस जी से कोई अन्य आदेश प्रस्तुत करने के लिये बोलती है तो ए एस जी जस्टिस भानुमति द्वारा पारित एम सी डी vs सुरेन्द्र कुमार वाद का आदेश दिखाती हैं ।
कोई और आदेश माँगे जाने पर ए एस जी बताती हैं की सिंगल जज द्वारा जिस आधार पर 40-45 तय किया गया है वे सब केस इंटरव्यू के संदर्भ में हैं जिनका इस केस से कोई सम्बंध नहीं है । वैसे इस सबंध में तेज प्रकाश पाठक केस लार्जर बेंच में अभी pending है, लेकिन मेरा submission यही है कि इस परीक्षा में कट ऑफ़ इंटरव्यु के लिए नहीं निर्धारित की गई है यहाँ कट ऑफ़ लिखित परीक्षा हेतु तय की गई है । लॉर्डशिप यह कहा जाना कि यह हाई कट ऑफ़ आनन्द कुमार यादव केस के पारित आदेश में मिले लाभ को nullify करने के लिये लगाया गया है, एकदम गलत है मैने इसके पक्ष में आपके समक्ष कई जजमेंट प्रस्तुत किये हैं । आपने बहुत कम भारांक देने के लिए स्टेट को निर्देश दिया था इस पर जज बोलते हैं कि मैडम वो केवल एक उदाहरण था, वो कोई बाध्यकारी observation नहीं था ।
ए एस जी ने कहा की स्टेट कभी भी आनन्द कुमार यादव आदेश में शिक्षामित्रों को मिले लाभ को mitigate नहीं करना चाहता । कोर्ट ने कहा कि हम यह नही कह रहे हैं कि कोई जान बूझ कर ऐसा कर रहा है हमारा कहना है कि जो भी किया जा रहा है वो भारांक को प्रभावित कर रहा है और जो किया जा रहा है वो permissible है या नहीं ? 
ए एस जी द्वारा अंत में कहा गया कि हम आनन्द कुमार यादव आदेश का पूर्णरूपेन पालन कर रहे हैं। 
कोर्ट द्वारा altranate suggestion के बारे में पूछे जाने पर ए एस जी द्वारा कहा गया कि हम 69000 की लिस्ट आ चुकी है जिला आवंटित हो चुका है आप इस पूरा करने की इजाजत दें साथ ही अगर आप आदेश देंगे तो हम शिक्षामित्रों को भविष्य में होने वाली भर्ती में उनके द्वारा आनन्द कुमार यादव आदेश के अनुपालन में लिये जा रहे लाभ के साथ मौका देंगे ।
और इसी के साथ स्टेट की तरफ से उपस्थित ए एस जी का submission पूरा हो गया।