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Tuesday, 13 October 2020

69,000 शिक्षक भर्ती : कोर्ट के आदेशों को दरकिनार कर जारी सूची पर उठ रहे कई सवाल

69,000 शिक्षक भर्ती : कोर्ट के आदेशों को दरकिनार कर जारी सूची पर उठ रहे कई सवाल


69000 शिक्षक भर्ती : किसी जिले में 100 प्रतिशत तो कहीं 20 फीसदी सीटें भरी, उठ रहे सवाल

प्रयागराज। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव प्रताप सिंह बघेल ने भले ही जिला आवंटन की सूची जारी कर दी है, परंतु इस मामले को लेकर विवाद अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।


परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 69000 सहायक अध्यापक भर्ती के क्रम में मुख्यमंत्री के आदेश पर बेसिक शिक्षा विभाग ने 31277 अभ्यर्थियों की लिस्ट तो जारी कर दी है लेकिन इसको लेकर विवाद होना तय है। अफसरों ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों की अनदेखी करते हु उन अभ्यर्थियों को बाहर कर दिया हैं जिन्होंने आवेदन के समय पूर्णांक-प्राप्तांक आदि भरने में गलती कर दी थी। इसे लेकर अभ्यर्थियों ने एक जून को पहली लिस्ट जारी होने से पहले ही काफी धरना व प्रदर्शन किया था। लेकिन अधिकारियों ने एक न सुनी और पहली लिस्ट जारी कर दी।


69,000 सहायक अध्यापक भर्ती को लेकर अभी कोर्ट का फैसला नहीं आया है। आवेदन में गलती करने वाले कुछ अभ्यर्थियों के आवेदनों में संशोधन के लिए सुप्रीम कोर्ट एवं हाईकोर्ट की ओर से बेसिक शिक्षा परिषद को आदेश दिया गया है। लेकिन विभाग ने आवेदन आवंटन सूची जारी करके विवाद को हवा दे दी है। कोर्ट में याचिका दाखिल करने वालों का कहना है कि वह इस मामले में अवमानना की अपील दायर करेंगे। उधर कुछ अभ्यर्थियों ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग में भी शिकायत की है, इस मामले की भी सुनवाई चल रही है।


69000 सहायक अध्यापक भर्ती के तहत सोमवार को जारी 31277 अभ्यर्थियों की सूची में जिलेवार सीट में भारी अनियमितता है। किसी जिले में रिक्त 100 प्रतिशत पदों को भर दिया गया है तो कहीं 20 प्रतिशत सीटें भी आवंटित नहीं हो सकी है। 

अब सवाल यह है कि जिन जिलों में 50 प्रतिशत या उससे अधिक सीटें भरी गई हैं वहां शिक्षामित्रों का क्या होगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के क्रम में प्रदेश सरकार ने 40/45 प्रतिशत कटऑफ पर पास हो रहे 37

हजार से अधिक शिक्षामित्रों की सीटें आरक्षित रखते हुए अन्य अभ्यर्थियों का सीट आवंटन जारी किया है। सोमवार को जारी लिस्ट में वाराणसी में खाली सभी 230 सीटों, लखनऊ में 150 सीटों और गाजियाबाद में 2 के सापेक्ष शत-प्रतिशत अभ्यर्थियों का आवंटन हुआ है। इसी प्रकार प्रयागराज में 990 सीटों के सापेक्ष 979, प्रतापगढ़ में 1330 सीटों पर 1176, कानपुर नगर में 350 सीटों के सापेक्ष 346, मेरठ में 130 सीटों पर 128, कानपुर देहात में 520 सीटों के सापेक्ष 469 अभ्यर्थियों को चुना गया है। जबकि फर्रुखाबाद, बदायूं, मऊ, सीतापुर में सीट के सापेक्ष 20 प्रतिशत अभ्यर्थियों का आवंटन भी नहीं हुआ है। अब जब 37 हजार से अधिक शिक्षामित्रों का फैसला होगा तो उनको जिला आवंटन कैसे होगा यह अपनेआप में बड़ा सवाल है।

 वाराणसी, लखनऊ प्रयागराज, प्रतापगढ़, कानपुर नगर व कानपुर देहात और मेरठ जैसे जिलों के शिक्षामित्रों को अपना जिला नहीं मिल पाएगा जो फिर विवाद की वजह बनेगा।

 अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार को 31277 अभ्यर्थियों की लिस्ट जारी करने के बजाय सुप्रीम कोर्ट में 26 जुलाईसे आरक्षित आदेश जारी करवाने के लिए पैरवी करनी चाहिए थी। 2 जून को सुप्रीम कोर्ट से काउंसिलिंग पर रोक लगने के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने अपने मूल प्रमाण पत्र और डिमांड ड्राफ्ट वापस ले लिया था।



सवाल

● 69000 भर्ती में 31277 अभ्यर्थियों की लिस्ट पर उठ रहे सवाल
● अभ्यर्थियों का आरोप अधिक मेरिट वालों को कर दिया बाहर
● वाराणसी और लखनऊ में सीट के सापेक्ष 100 प्रतिशत आवंटन
● फर्रखाबाद, बदायूं, मऊ, सीतापुर में 20% सीट भी नहीं भरी गई