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Wednesday, 14 October 2020

नई सूची ने 36590 चेहरों की रौनक छीनी, 69000 भर्ती की पहली लिस्ट में थे शामिल पर दूसरी से हुए बाहर

नई सूची ने 36590 चेहरों की रौनक छीनी, 69000 भर्ती की पहली लिस्ट में थे शामिल पर दूसरी से हुए बाहर

 
बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक विद्यालयों में 9 हजार सहायक अध्यापक भर्तों के सापेक्ष सोमवार को जारी 31,277 अभ्यर्थियों की सूची ने हजारों चेहरों की मुस्कान छीन ली। हाई मेरिट वाले अभ्यर्थियों को तो जिला आवंटन हो गया, लेकिन कम मेरिट वाले मायूस हैं। 


एक जून को जारी 67867 अभ्यर्थियों की लिस्ट में शामिल 36590 अध्यर्थी नई सूची में स्थान नहीं बना सके हैं। एक जून को लिस्ट जारी होने के बाद काउंसिलिंग के लिए इन अभ्यर्थियों ने हजागें रुपये फूंककर गाड़ी बुक की थी और सैकड़ों किमी. दूर जिलों में गए थे। तीन जून को जब काउँसलिंग पर कोर्ट ने रोक लगाई तो इन्होंने नहीं सोचा था कि सवा चार महोने बाद सूची से बाहर कर दिया जाएगा। 31277 की सूची जारी होने के बाद पुरानी सूची से बाहर हुए 36,590 को न भूख लग रही है, न नोंद आ रही है। प्रतापगढ़ के अभय प्रताप सिंह का पहली सूची में अमेठी में चयन हुआ था लेकिन सोमवार को जारी सूची में नाम नहीं है। प्रतापगढ़ की ही भावना त्रिपाठी का सुल्तानपुर में चयन हुआ था लेकिन इस बार बाहर हो गई हैं।

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69000 शिक्षक भर्तीः हाथ आई नौकरी जाने से पूर्व चयनितों में निराशा

 
प्रयागराज। 12 अक्तूबर को जारी 31277 सहायक अध्यापकों की सूची में चयनित अभ्यर्थी भी असमंजस में हैं तो पूर्व में चयनित और इस बार सूची से बाहर होने वालों में गहरी निराशा है। सिविल सेवा, पीसीएस, खंड शिक्षा अधिकारी एवं माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की परीक्षाओं से बाहर हो गए बेरोजगारों के लिए प्राथमिक विद्यालयों के लिए निकली 69000 सहायक अध्यापक भर्ती से बड़ी उम्मीदें थीं। सूची से बाहर होने वाले अभ्यर्थियों ने सरकार की नौकरी देने वालों से अधिक को निराश करने की नीति पर सवाल उठाए हैं।


प्रदेश सरकार की ओर से 69000 सहायक अध्यापक भर्ती में 37339 अभ्यर्थियों को बाहर करके 31277 को नौकरी देने पर इन अभ्यर्थियों का कहना है कि एक ही परीक्षा दी, एक साथ परिणाम आया फिर नियुक्ति प्रक्रिया से उन्हें बाहर क्यों किया गया। जून में घोषित मेरिट में चुने गए भदोही के प्रतियोगी छात्र उमेश कुमार दुबे लगातार पीसीएस सहित दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल हो रहे हैं। वह पीसीएस एवं उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में साक्षात्कार तक पहुंच चुके हैं। अब एक अदद नौकरी के लिए प्राथमिक विद्यालय की 69000 शिक्षक भर्ती से उम्मीद थी। वह भी हाथ आकर चली गई।

चित्रकूट में पूर्व में चयनित धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि आखिर में कितना इंतजार किया जाए। पहले ही सरकार की देरी के चलते डेढ़ साल तक कोर्ट में मामला फंसा रहा। रिजल्ट आया तो सरकार के गलत निर्णय के कारण चयन सूची में आने के बाद बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। नौकरी की उम्मीद लिए इन युवाओं ने प्राथमिक शिक्षक की नौकरी से भविष्य के सपने संजोए थे, वह भी टूट गया। विकास मिश्र का लखीमपुर खीरी में चयन हुआ था, वह भी अब इस भर्ती से नाउम्मीद दिखाई पड़ रहे हैं।