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Tuesday, 8 September 2020

देश में प्रति छात्र खर्च तो बढ़ा पर शिक्षकों की ट्रेनिंग पर खर्च बेहद कम

देश में प्रति छात्र खर्च तो बढ़ा पर शिक्षकों की ट्रेनिंग पर खर्च बेहद कम



देश में बीते कुछ वर्षों में प्रति छात्र खर्च बढ़ा है लेकिन टीचर्स ट्रेनिंग पर खर्च बेहद कम है। इस बात का खुलासा अकांउटेबिलिटी इनीशिएटिव की रिपोर्ट में हुआ है।...




नई दिल्ली । देश में बीते कुछ वर्षों में प्रति छात्र खर्च बढ़ा है, लेकिन टीचर्स ट्रेनिंग पर खर्च बेहद कम है। इस बात का खुलासा अकांउटेबिलिटी इनीशिएटिव की रिपोर्ट में हुआ है। इस रिपोर्ट में आठ राज्यों- महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, बिहार, राजस्थान के शिक्षा बजट का आकलन किया गया है। रिपोर्ट में स्कूल खर्च को प्रशासन, स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षक के वेतन, इक्विटी और इनक्लूजन, मॉनिटरिंग और निरीक्षण, छात्रों को इंसेंटिव और क्वालिटी में बांटकर अध्ययन किया गया।


रिपोर्ट के अनुसार, प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के मामले में प्रति बच्चा शिक्षा खर्च में 2014-15 के मुकाबले 2017-18 में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, इस दौर में बच्चों के नामांकन में कमी भी आई है।


रिपोर्ट में कई और रोचक तथ्य सामने आए हैं। 2014-15 और 2017-18 के बीच प्रति छात्र खर्च आठ सैंपल राज्यों में बढ़ा है। इस दौर में अन्य राज्यों को छोड़कर राजस्थान के सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ा है।


रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सबसे अधिक माध्यमिक स्तर (नौ से 12) पर अधिक खर्च करते हैं, जबकि प्राथमिक शिक्षा (1 से आठ) पर कम खर्च करते हैं। आर्थिक तौर पर अधिक समृद्ध राज्य महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश सीएसएस (सेंट्रल स्पांसर्ड स्कीम) पर कम निर्भर थे, जबकि बिहार और राजस्थान अधिक निर्भर थे। 2014-15 और 2017-18 में स्कूली खर्च की सालाना बढ़ोतरी उड़ीसा, मध्य प्रदेश और बिहार में अधिक थी, जबकि महाराष्ट्र और तमिलनाडु में कम थी। बिहार को छोड़कर अन्य राज्यों में स्कूली शिक्षा का खर्च खुद के बजट स्रोतों से आया था, जो कि 70 से 93 फीसदी था, जबकि बिहार का सीएसएस से 48 फीसदी तक खर्च आता है।


स्कूली खर्च में टीचरों के वेतन का शेयर अधिक

अकांउटेबिलिटी इनीशिएटिव की रिपोर्ट में सामने आया कि स्कूल के खर्च में शिक्षकों के वेतन का शेयर सबसे अधिक है। 2016-17 और 2017-18 में इन राज्यों में स्कूली खर्च में शिक्षकों के वेतन का शेयर 73 फीसदी से 86 फीसदी तक था। अध्ययन के मुताबिक, शिक्षकों के प्रशिक्षण पर एक फीसदी या इससे कम खर्च हुआ। तमिलनाडु ने 2017-18 में 5 फीसदी टीचर्स ट्रेनिंग पर खर्च किया, जो कि अन्य राज्यों की तुलना में अधिक था। शिक्षकों के वेतन के बाद बच्चों के इंसेंटिव पर दूसरा सबसे अधिक खर्च था। इसमें यूनीफॉर्म, टेक्स्ट बुक, एमडीएम, मेरिट स्कॉलरशिप आदि शामिल हैं। इसके अलावा, प्रशासन और स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर भी स्कूल खर्च के शेयर में शामिल थे। बिहार में 37 प्रतिशत शिक्षक प्रशिक्षित नहीं हैं, जबकि पश्चिम बंगाल में यह प्रतिशत 28 है।


कोरोना से पड़ा खर्च पर असर

अध्ययन में सामने आया कि स्कूली बजट का बड़ा हिस्सा राज्य सरकारों द्वारा जुटाए गए राजस्व से आता है। इसमें से कुछ शेयर केंद्र सरकार के टैक्स से आता है। कोरोना की वजह से टैक्स जुटाने की दर में भी कमी आई है, जिसका असर शिक्षा बजट पर आया है।