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Wednesday, 9 September 2020

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल को लेकर राज्यों के साथ मोदी सरकार टकराव के मूड में नहीं

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल को लेकर राज्यों के साथ मोदी सरकार टकराव के मूड में नहीं


 नई दिल्ली : राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल पर ज्यादा लचीला रूख रखने के पीएम नरेंद्र मोदी के मंत्र के बाद शिक्षा मंत्रालय अब ऐसे राज्यों के साथ अलग से भी चर्चा की तैयारी में जुट गया है। मंत्रालय का मानना है कि नीति का अमल तभी तेजी से हो पाएगा, जब इससे जुड़े सभी विषयों को लेकर आपसी समझ बढ़ेगी। साथ ही नीति के उद्देश्य स्पष्ट होंगे।

पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, दिल्ली के रुख के बाद तेज हुई तैयारी

अब तक जिन राज्यों से असहमति या आशंकाएं सामने आयी है, उनमें पश्चिम बंगाल, तमिलनाडू और दिल्ली है। मंत्रालय से जुड़े सूत्रों की मानें तो इन राज्यों के साथ ही जल्द ही अलग-अलग से चर्चा की जाएगी। साथ ही उनकी आशंकाओं को समझा जाएगा और जवाब भी दिया जाएगा।

मोदी सरकार टकराव के मूड में नहीं

फिलहाल नीति के अमल को लेकर राज्यों के साथ केंद्र किसी भी तरह के टकराव के मूड में नहीं है। वैसे भी पीएम मोदी ने सोमवार को राज्यपालों के सम्मेलन में साफ कर दिया था, कि शिक्षा नीति सरकार की नीति नहीं है, बल्कि यह देश की नीति है। जिसमें सभी को इसे मिलजुलकर लागू करना है।



शिक्षा नीति के अमल को लेकर चर्चा कई चरणों में होगी

मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक शिक्षा नीति के अमल को लेकर सभी साझीदारों के साथ चर्चा की जो मुहिम शुरु की गई है, इससे पीछे भी यही उद्देश्य है, कि नीति को लेकर किसी तरह कोई भ्रम न रहे। यह चर्चा पूरे सितंबर महीने अलग-अलग चरणों में होगी।

केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ होगी 19 सितंबर को चर्चा

राज्यपालों और राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के बाद अब सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों के निदेशकों के साथ यह बैठक होगी। जो संभव है कि 19 सितंबर को होगी। इसके बाद शिक्षाविदों, शिक्षकों, अभिभावकों, छात्रों के साथ भी यह चर्चा होगी। सभी विश्वविद्यालयों से भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर कई दौर की चर्चा करने के लिए कहा गया है। साथ ही इसका फीडबैक भी मांगा गया है। इस बीच अब इन राज्यों के साथ भी चर्चा की योजना बनाई जा रही है। गौरतलब है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर राज्यपालों और राज्यों के शिक्षा मंत्रियों वर्चुअल सम्मेलन के बाद पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और दिल्ली ने सवाल खड़े थे। इस दौरान पश्चिम बंगाल ने फिलहाल इसे लागू न करने का ऐलान किया है। जबकि बाकी राज्यों ने इसके अलग-अलग पहलुओं को लेकर सवाल खड़े किए है।