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Tuesday, 9 June 2020

69 हजार शिक्षक भर्ती रद होना आसान नहीं, व्यापक धांधली पर ही रद्द करने पर हो सकेगा विचार

69 हजार शिक्षक भर्ती रद होना आसान नहीं, व्यापक धांधली पर ही रद्द करने पर हो सकेगा विचार 


09 Jun 2020
प्रयागराज। 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा में अनुचित साधन से पास करने वालों की धरपकड़ के बाद से असंतुष्ट अभ्यर्थी परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर नए सिरे से भर्ती कराने की मांग उठा रहे हैं। कुछ लोग भर्ती रद्द करने के लिए कोर्ट जाने की भी बात कह रहे हैं। लेकिन यह आसान नहीं है। नियमानुसार 10 प्रतिशत धांधली साबित होने के बाद ही परीक्षा रद्द करने पर विचार हो सकता है। 



साक्ष्यों के साथ यदि यह साबित हो जाए कि परीक्षा में सफल 146060 अभ्यर्थियों में से 10 प्रतिशत लोग धांधली से पास हुए हैं तभी परीक्षा निरस्त हो सकती है। हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक के तमाम आदेश हैं कि जब तक 10 प्रतिशत धांधली साबित नहीं होती तब तक परीक्षा रद्द करने की बात भी न करें। इससे स्पष्ट है कि धांधली से पास होने वालों का परिणाम निरस्त करते हुए उन्हें चयन प्रक्रिया से बाहर तो किया जा सकता है लेकिन पूरी भर्ती रद्द नहीं कराई जा सकती है। 


72,825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती में भी उठा था मामला: नवंबर 2011 में शुरू हुई 72,825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती के लिए प्रदेश में पहली बार हुई शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में भी धांधली के आरोप लगे थे। मसला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। इसलिए परीक्षा निरस्त नहीं हुई और उसमें पास 66655 शिक्षक प्राइमरी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। मजे की बात तो यह है कि 72,825 परीक्षा में फेल एक अभ्यर्थी ने पेपर रद्द कराने के लिए याचिका की थी जिस पर हाईकोर्ट ने कहा था कि उसने टीईटी 2011 में पास 2 लाख 72 हजार लोगों की प्रतिभा पर शक किया है।



किसी परीक्षा में 10 प्रतिशत से अधिक अभ्यर्थियों के धांधली से पास होने की बात साबित होने पर ही उसे निरस्त किया जा सकता है। 69 हजार भर्ती परीक्षा में कुछ अभ्यर्थियों को 142 नंबर तक मिले हैं। ये जांच होनी चाहिए की 75 प्रतिशत से अधिक नंबर कितनों को मिले हैं और उनका एकेडमिक रिकॉर्ड क्या है। यदि व्यापक धांधली मिले तो परीक्षा निरस्त करनी चाहिए।- राधाकान्त ओझा, वरिष्ठ अधिवक्ता हाईकोर्ट और पूर्व अध्यक्ष हाईकोर्ट बार एसोसिएशन