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Sunday, 14 June 2020

68500 : जम्मू- कश्मीर से प्रशिक्षित अभ्यर्थी तैनाती को और नियुक्त वेतन को हैं परेशान

जम्मू- कश्मीर से प्रशिक्षित अभ्यर्थी तैनाती को और नियुक्त वेतन को हैं परेशान


■ सूरतेहाल
● बागपत, शामली और सीतापुर में आधा दर्जन अभ्यर्थियों को नहीं मिली ज्वाइनिंग 
● ज्वाइनिंग के पौने दो साल बाद भी बहराइच में तीन शिक्षकों को नहीं दिया वेतन


68,500 सहायक अध्यापकों की भर्ती है डेढ़ साल से अधिक होने के लेकिन जम्मू-कश्मीर से शिक्षण प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को किसी जिले में तैनाती तो कहीं अब तक वेतन नहीं दिया जा रहा है।


 बागपत में सोनिया, अजय कुमार व सीमा, शामली में शालू शर्मा व सीमा रानी और सीतापुर में अनुराग सिंह को अब तक तैनाती नहीं मिली है। जबकि बहराइच में प्रमोद समेत तीन शिक्षकों को नियुक्ति के बाद 20 महीने से वेतन नहीं मिल रहा है। जम्मू-कश्मीर राज्य विद्यालय शिक्षा बोर्ड से दो वर्षीय डिप्लोमा इन एलीमेंट्री टीचर ट्रेनिंग कोर्स करने वाले प्रवीण कुमार को मुरादाबाद, श्रावस्ती में रेशमा, अमरोहा में अंकुर, अलीगढ़ में एजाज अली, सिद्धार्थनगर में कुमारी प्रिया को तैनाती के साथ वेतन भी मिल रहा है।



 इन अभ्यर्थियों का कहना है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय के आदेश पर एनसीटीई ने 2007 में सभी राज्यों के शिक्षा सचिवों को पत्र जारी कर जम्मू कश्मीर से प्राप्त डिप्लोमा या डिग्री पूरे देश में रोजगार के लिए मान्य घोषित किया था। कोर्ट ने भी जम्मू-कश्मीर से डिप्लोमा करने वालों को नियुक्ति न देना संविधान का उल्लंघन माना है।


अभ्यर्थियों का तर्क है कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है तो फिर वहां के मान्यता प्राप्त कॉलेज से डीएलएड करने वालों को नियुक्ति न देना समानता के अधिकार का उल्लंघन होना चाहिए। इनका दावा है कि जम्मू-कश्मीर से डिप्लोमा इन एलीमेंट्री टीचर्स ट्रेनिंग कोर्स करने वाले हजारों लोग दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब राज्य के अलावा केंद्रीय विद्यालय में नौकरी कर रहे हैं।



जम्मू-कश्मीर से डिप्लोमा करने वालों की समस्या की जानकारी है। पूर्व सचिव रूबी सिंह ने इस संबंध में शासन को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा था। शासन से मार्गदर्शन मिलने के बाद ही इस मामले में कुछ किया जा सकेगा। -विजय शंकर मिश्र, कार्यवाहक सचिव बेसिक शिक्षा परिषद