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Monday, 15 June 2020

शिक्षामित्रों के लिए 37,339 पद खाली नहीं रख सकते - सरकार

यूपी सरकार शिक्षा मित्रों के भर्ती विवाद मामले में सुनवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट पहुंची

शिक्षामित्रों के लिए 37,339 पद खाली नहीं रख सकते - सरकार

मामले की सुनवाई आज  होने की संभावना




उत्तर प्रदेश में शिक्षा मित्रों की भर्ती का विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। सुनवाई की तय तारीख 14 जुलाई से पहले अब राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है और कहा है कि उसे शिक्षामित्रों के बगैर ही 69,000 सहायक शिक्षकों की भर्ती करने दी जाए। 


शिक्षक भर्ती परीक्षा, 2019 में सिर्फ 8,018 शिक्षा मित्र ही 65/60 (सामान्य/आरक्षित) फीसदी उत्तीर्ण अंक लेकर पास हुए हैं। वहीं इन पास अंकों से कम लेकिन 45/40 फीसदी से ज्यादा अंक वाले शिक्षा मित्रों की संख्या 32,629 है,37,339 नहीं जो कि 9 जून 2020 के आदेश में आ गया था।  कोर्ट ने राज्य सरकार को 37,339 पर नहीं भरने का आदेश दिया था क्योंकि कोर्ट को बताया गया था कि 45/40 फीसदी से ज्यादा अंक लेने वालों की संख्या 37,339 है। सरकार ने कहा कि शिक्षामित्रों के लिए 37,339 पद खाली नहीं रख सकते।


 राज्य में शिक्षकों के 51,112 पद अभी और खालीः अधिवक्ता राकेश मिश्रा के जरिए शीर्ष अदालत में दाखिल विस्तृत अर्जी में राज्य सरकार ने कहा कि प्रदेश में सहायक शिक्षकों की 51,112 रिक्तियां मौजूद हैं जिनकी भर्ती और विज्ञापन प्रक्रिया अभी शुरू नहीं की गई है। यदि कोर्ट सरकार को शिक्षक भर्ती परीक्षा, 2019 को जारी रखने की अनुमति दे तो किसी पक्ष का कोई नुकसान नहीं होगा। फैसला होने पर शिक्षा मित्रों को अगली भर्ती में एडजस्ट किया जा सकता है। यदि पद खाली रखे जाते हैं तो इससे अनावश्यक मुकदमेबाजी पैदा होगी क्योंकि 65/60 फीसदी से कम अंक लेने वाले गैर शिक्षामित्र उम्मीदवार इसी आधार पर नियुक्ति लेने का दावा करेंगे। ऐसे लोगों की संख्या 2,15,000 (सामान्य और आरक्षित दोनों) से ज्यादा है। वहीं शिक्षा मित्रों को उस भर्ती में एडजस्ट करने से जिलों में आवेदन, आरक्षण और रोस्टर की समस्या पैदा होगी जिससे जटिलता बढ़ेगी और भर्ती में बेहद विलंब होगा। साथ ही, शिक्षा का नुकसान होगा क्योंकि स्कूलों में शिक्षण कार्य के लिए शिक्षक उपलब्ध नहीं होंगे।


 यह है विवाद 
शिक्षामित्रों का कहना है कि जो भी योग्य शिक्षामित्र 45/40 से ज्यादा अंक हासिल करते हैं, उन्हे भारांक देकर नियुक्ति दी जाए, लेकिन सरकार ने 2019 की परीक्षा में कट ऑफ अंक बढ़कर 65/60 कर दिए जिससे 32,629 शिक्षामित्र उम्मीदवार बाहर हो गए। हाईकोर्ट से उन्हें कोई राहत नहीं मिली थी तो सुप्रीम कोर्ट आ गए।


दरसअल भारांक देने की बात सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में की थी जब प्रदेश में लाखों शिक्षामित्रों की सहायक शिक्षक पद पर नियुक्ति को अवैध मानकर निरस्त किया गया था। कोर्ट ने कहा था कि भविष्य में होने वाली भर्ती में इन शिक्षामित्रों के अनुभव को देखते हुए सरकार अतिरिक्त भरांक देने पर विचार कर सकती है। मामले की सुनवाई सोमवार को होने की संभावना है।


प्रदेश सरकार ने कहा, कोई शिक्षा मित्र सहायक शिक्षक नहीं
 सरकार ने कहा कि एक मई के आदेश में कोर्ट ने आदेश दिया था कि सहायक शिक्षक के रूप में काम कर रहे किसी शिक्षामित्र को न छुआ जाए। मिश्रा ने अर्जी में कहा कि वास्तविकता यह है कि कोई शिक्षा मित्र सहायक शिक्षक के तौर पर नहीं है। उन्हें 2108 में ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पदावनत कर शिक्षामित्र बना दिया गया था। इस आदेश में भी सुधार किया जाना आवश्यक है।


■ शिक्षामित्रों पर एक नजर 
● राज्य में काम कर रहे शिक्षा मित्र : 1,52,330
● शिक्षक परीक्षा में बैठे शिक्षामित्र : 45,357 
● 65 फीसदी से कम लेकिन 45 फीसदी से ज्यादा अंक लाने वाले शिक्षामित्र : 9,386
● 60% से कम लेकिन 40% से ऊपर अंक लेने वाले : 23,243 (कुल फेल 32,629) 
● 65 फीसदी से ऊपर वाले शिक्षा मित्र : 1,561 
● 60 फीसदी से उपर अंक वाले शिक्षक मित्र 6,457 (कुल पास 8,018)